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जो बर्फ़ की चोटियों पर भी देश का दीप जलाते हैं,

वही सच की राह में अक्सर बेड़ियों से सजाए जाते हैं।

कैद कर सकते हो जिस्म को, विचारों को नहीं,

देशभक्ति झुकती नहीं, सत्ता के दरबारों में।

जो हिमालय की पीड़ा को हिंदुस्तान की आवाज़ बनाते हैं,

इतिहास गवाह है, ऐसे लोग ही देश का भविष्य बचाते हैं।

सलाम उन हर आवाज़ों को, जो भारत के हित में उठती हैं

देश पहले, सत्ता बाद में… यही सच्ची राष्ट्रभक्ति कहलाती है।।

देश के अंदर यह अघोषित इमरजेंसी है सोनम वांगचुक देश के भविष्य के लिए सिर्फ एक इस्तीफा मांग रहे थे लेकिन सत्ता के नशे में चूर सरकार कोई भी फैसला लेने में असमर्थ है।

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जो बर्फ़ की चोटियों पर भी देश का दीप जलाते हैं,

वही सच की राह में अक्सर बेड़ियों से सजाए जाते हैं।

कैद कर सकते हो जिस्म को, विचारों को नहीं,

देशभक्ति झुकती नहीं, सत्ता के दरबारों में।

जो हिमालय की पीड़ा को हिंदुस्तान की आवाज़ बनाते हैं,

इतिहास गवाह है, ऐसे लोग ही देश का भविष्य बचाते हैं।

सलाम उन हर आवाज़ों को, जो भारत के हित में उठती हैं

देश पहले, सत्ता बाद में… यही सच्ची राष्ट्रभक्ति कहलाती है।।

देश के अंदर यह अघोषित इमरजेंसी है सोनम वांगचुक देश के भविष्य के लिए सिर्फ एक इस्तीफा मांग रहे थे लेकिन सत्ता के नशे में चूर सरकार कोई भी फैसला लेने में असमर्थ है।

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NEET Student strick Delhi Jantar mantar अचूक निशानेबाज जंतर मंतर से संसद मार्च 20 जुलाई 2026 को रोकने के लिए तैनात, लोकतंत्र को नोचने वाले न्यूज चैनलों के भेड़ियों और भेड़ों की तमाम दुष्टताओं के बावजूद बच्चों और नौजवानों ने अपनी बात देश और दुनिया तक पहुंचा दी। ये बात छिपी नही रह सकी कि अपनी बात कहने आए सैकड़ों युवा जब घायल थे, दर्जनों खून से लथपथ थे, बच्चियों के कपड़े फाड़ डाले गए थे, उन्हें सड़कों पर घसीटा जा रहा था तो भारत का कायर और निर्लज्ज प्रधानमंत्री संसद से बच्चों को पीठ दिखाकर भाग रहा था। और उसे सवालों से बचाने के लिए बंदूकों की नालें भारत माता की जय और वंदे मातरम का नारा लगाते निहत्थे नौजवानों की तरफ तान दी गई थीं। भारत ने इससे पहले इतना कायर, इतना क्रूर और इतना कमजर्फ प्रधानमंत्री नहीं देखा।इस बात को लिख लीजिए। जंतर-मंतर से आई क्रूरता और बर्बरता की तस्वीरें नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी का सालों साल पीछा करेंगी। और न्यूज चैनलों के दरिंदे उसे ढंक नहीं पाएंगे। तुम्हारी चुप्पियां पलायन नहीं है, तुम्हारे आलीशान न्यूज रूम्स और स्टूडियोज के दरिंदों के झुंड में बदल जाने का एलान है।चैनलों के बेशर्म संपादकों, एंकरों, संवाददाताओं तुम जेबें क्यों नहीं काटते, बैंक क्यों नहीं लूटते, डकैती क्यों नहीं करते। इनमें से सबकुछ उससे ज्यादा सम्मानजनक या कम शर्मनाक होता जो तुम अभी कर रहे हो। सैकड़ों बच्चों को कुचले जाते, रौंदे जाते, घसीटे जाते, लहूलुहान होते देखने के बावजूद तुम्हें नींद कैसे आती है। तुम्हारे अपने बच्चे तुम्हारे मुंह पर थूकेंगे एक रोज। कम से कम उनसे डरो।हम पहले समझते थे तुम भी रोटी ही खाते होगे, लेकिन तुम तो आदमखोर हो चुके हो, इंसान खाने लगे हो तुमलोग। थू। Navin Kumar See less

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