विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुरू किए गए ‘नेचर नीड्स यू’ अभियान ने लोगों को अपने दैनिक व्यवहार और पर्यावरण के बीच संबंध पर सोचने के लिए प्रेरित किया।
बागपत, उत्तर प्रदेश। जब पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन की बात होती है, तो चर्चा अक्सर कारखानों, प्रदूषण, जंगलों की कटाई या वैश्विक नीतियों तक सीमित रह जाती है। लेकिन क्या आधी भरी पानी की बोतल छोड़ देना, जरूरत से अधिक खरीदारी करना या बार-बार उपयोग हो सकने वाली वस्तुओं को जल्दी बदल देना भी पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा है?
इन्हीं सवालों को केंद्र में रखकर माय भारत केंद्र बागपत से जुड़े उड़ान यूथ क्लब ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ‘नेचर नीड्स यू’ नाम से एक अंतरराष्ट्रीय जागरूकता अभियान चलाया। आयोजकों के अनुसार इस अभियान से भारत सहित 18 देशों के 10,755 लोग जुड़े।
अभियान का संचालन क्लाइमेट कार्डिनल्स यूवाईसी इंडिया चैप्टर के माध्यम से किया गया। इसकी विशेषता यह रही कि इसमें पर्यावरण संरक्षण को बड़े सिद्धांतों के बजाय लोगों के दैनिक जीवन से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों को ऐसे प्रश्नों और परिस्थितियों से रूबरू कराया गया, जो उनकी अपनी जीवनशैली से संबंधित थे।
इसके तहत आयोजित ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी में लोगों से पूछा गया कि यदि उनका मोबाइल फोन अभी भी ठीक काम कर रहा हो तो क्या केवल नए मॉडल के आकर्षण में उसे बदलना जरूरी है? या यदि किसी वस्तु की आवश्यकता न हो तो क्या केवल छूट मिलने के कारण उसे खरीदना उचित है? ऐसे प्रश्नों के माध्यम से लोगों को उपभोग, संसाधनों के उपयोग और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया गया।
अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी खासियत यही रही कि इसने पर्यावरण को किसी दूर की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि लोगों की अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर प्रस्तुत किया। आयोजकों के अनुसार छोटी-छोटी आदतें जब लाखों-करोड़ों लोग हर दिन दोहराते हैं, तो उनका प्रभाव स्थानीय सीमाओं से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर दिखाई देता है।
अभियान के दौरान पूर्ण अंक प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को डिजिटल प्रमाणपत्र दिए गए। साथ ही विभिन्न देशों से चयनित प्रतिभागियों की तस्वीरों को ‘नेचर नीड्स यू चैंपियंस’ नामक वैश्विक फोटो कोलाज में शामिल किया गया। सोशल मीडिया पर प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस पहल ने उन्हें अपनी जीवनशैली और पर्यावरण के बीच संबंध को नए तरीके से समझने में मदद की।

उड़ान यूथ क्लब के अध्यक्ष और क्लाइमेट कार्डिनल्स यूवाईसी इंडिया चैप्टर के कोऑर्डिनेटर अमन कुमार कहते हैं कि पर्यावरण को प्रभावित करने वाले कई निर्णय ऐसे होते हैं जिन्हें लोग सामान्य मानकर अनदेखा कर देते हैं। उनके अनुसार यदि लोग अपने दैनिक जीवन में कुछ जिम्मेदार विकल्प चुनना शुरू करें, तो उसका सकारात्मक प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई दे सकता है।
अभियान को छात्रों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों, इको क्लबों और विभिन्न युवा समूहों का भी सहयोग मिला। आयोजकों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह एहसास कराना था कि जलवायु और पर्यावरण से जुड़े समाधान केवल बड़े स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर लिए गए निर्णयों से भी शुरू हो सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्र से शुरू हुई यह पहल इस बात का उदाहरण भी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और युवा नेतृत्व के माध्यम से स्थानीय स्तर के विचार किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं।
