यह दिल्ली कोर्ट की जस्टिस सुधा है एक महिला है और एक महिला जज होते हुए इनका यह बयान बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण शर्मनाक इससे पहले इलाहाबाद के जज ने कहा था की नाडा खोलने स्तन दबाना वगैरा-वगैरा बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, झारखंड के जज ने कहा था की योनि के ऊपर वीर्यपात करना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, अब यह चंद्रशेखर सुधा है महिला जज है अब इनका कहना है की हाइमन नहीं फटा तो रेप नहीं माना जाएगा मतलब सब कुछ फट जाए सिर्फ हाइमन नहीं फटेगा तो रेप नहीं माना जाएगा क्या इन लोगों की घरों में बहन बेटी बहू या महिला होती नहीं है क्या,,,वह दो पुरुष थे बिना महिला के पैदा हो गए, लेकिन ये तो महिला है तो यह कैसे पैदा हो गई, महिला से ही पैदा हुई होगी,,, तो भारत के संविधान को यह लोग कहां लेकर जा रहे हैं और यह भारत के संविधान का मजाक उड़ाया जा रहा है,
मजाक बनाया जा रहा है
पूरी दुनिया में इसका क्या इंप्रेशन पड़ेगा इन लोगों को अंदाजा ही नहीं है कितना मजाक बनाया जाएगा यह लोग नहीं समझते सकते।

