Spread the love

उन्होंने एक बड़ा बर्तन रखा। जब दोनों चाय आतीं, वे मुस्कुराते हुए उन्हें उसमें उँडेल देते और फिर सब मिलकर बाँटकर पी लेते। उनके लिए वह सिर्फ चाय नहीं थी — वह एकता का स्वाद था।

जब महात्मा गांधी उनसे मिलने आए और यह सुना, तो उन्होंने लौटकर कहा कि सुभाषचंद्र बोस का सबसे बड़ा योगदान एक ऐसी सेना खड़ी करना है, जिसमें हिंदू-मुसलमान का भेद मिट गया है।

बाद में मुकदमे से बरी होकर सहगल, ढिल्लन और शाहनवाज़ गांधी से मिले। गांधी ने हँसते हुए पूछा, “तुम तीनों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश कौन है?” ढिल्लन ने जवाब दिया, “अब यह भी आप ही तय कर दीजिए।” सब खिलखिला पड़े — जैसे जेल की दीवारें भी मुस्कुरा उठी हों।

नफ़रत के बहाने हर युग में मिल जाते हैं, मगर प्रेम के अवसर भी उतने ही होते हैं। सवाल सिर्फ इतना है — हम चाय को बाँटेंगे, या दिलों को मिलाएँगे?

आप इसे कॉपी पेस्ट कर सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अंकित बालियान की दोना फैक्ट्री है। अंकित बालियान ने अपनी इस फैक्ट्री में बीते दो वर्षों 13 मजदूरों को बंधक बनाकर रखा हुआ था। अंकित बालियान इन मजदूरों को बुरी तरह टॉर्चर करता था। मुजफ्फरनगर पुलिस ने इन मजदूरों को आज़ाद कराया है। जानकारी के मुताबिक़ अंकित ने फैक्ट्री में पिटबुल डॉग खुले छोड़े हुए थे। पिटबुल्स के डर से कोई भी मजदूर बंधन से निकलने की हिम्मत नही कर पाता था। अंकित ने मजदूरों पर कैसा-कैसा जुल्म किया है, इसकी गवाही मजदूरों के शरीर पर पड़े चोट के निशान दे रहे हैं। किसी के शरीर पर बेतहाशा चोटों के निशान थे तो किसी को पीट-पीटकर हाथ-पांव सुजा दिये गये थे।

sbobet88

×