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दोस्तों, अगर जनरल एम. एम. नरवणे की आत्मकथा “Four Stars of Destiny” अप्रैल 2024 में समय पर छप जाती, तो शायद आज की राजनीति का नक्शा ही बदल गया होता।

किताब में अग्निवीर योजना पर जो लिखा है, वो सीधे-सीधे मोदी सरकार की नीति की नींव हिला देने वाला है:

  • अग्निवीर योजना सेना के लिए पूरी तरह “आकस्मिक झटका” थी…सेना “हतप्रभ” रह गई।
  • वायुसेना और #नौसेना के लिए ये “bolt from the blue” थी – यानी आसमान से बिजली गिरी हो, वैसा अचानक और विनाशकारी।
  • सरकार ने “बिना सेना की ठोस सहमति और गहन मशविरे” के इसे जबरन लागू कर दिया।
  • सेना ने सिफारिश की थी – “75% अग्निवीरों को स्थायी सेवा” में रखा जाए। सरकार ने कर दिया – सिर्फ 25%”।
  • शुरुआती वेतन रखा गया था “₹20,000” जनरल नरवणे ने आपत्ति जताई कि ये तो दिहाड़ी मजदूर से भी कम है।
    तब जाकर इसे “₹30,000” तक बढ़ाया गया।

किताब की रिलीज का टाइमिंग देखिए:
“अप्रैल 2024” – #लोकसभा चुनाव जोरों पर थे।
उत्तर प्रदेश में बीजेपी को पहले ही भारी झटका लग चुका था।
अगर अग्निवीर का ये पूरा सच सामने आ जाता – युवाओं का गुस्सा, सेना परिवारों की बेचैनी, करियर की अनिश्चितता – नतीजा क्या होता यह आप समझ सकते हैं।

लेकिन हुआ क्या?
रक्षा मंत्रालय ने “समीक्षा” के नाम पर किताब पर कुंडली मार ली।
अमेजन को हजारों प्री-ऑर्डर रद्द करने पड़े।
आज तक किताब बाजार में नहीं आई।
“रिव्यू आजतक पूरा नहीं हुआ”।

राहुल गांधी ने संसद के बाहर किताब की कॉपी लहराई।
राजनाथ सिंह को सफाई देनी पड़ी।
लेकिन असली सवाल वही है जो हर कोई पूछ रहा है:

क्या सच्चाई को हमेशा के लिए दबा दिया जाएगा?
क्या जनरल नरवणे की आवाज कभी जनता तक नहीं पहुँचेगी?
” या अग्निवीर का सच आखिरकार बाहर आएगा और सारे राज खोल देगा “?

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