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परिस्थिति सदा एक समान नहीं रहती है। प्रशासन या बी एल ओ द्वारा अभी लोगों को समझाने की बहुत कोशिश की जा रही है। अन्य कोई विकल्प हमारे पास नहीं है।

जिस तरह से आज हम अपने बड़ों के 2002-2003 के वोटर लिस्ट में नाम ढूंढ रहे हैं, आने वाले समय में हमारी पीढ़ी हमारे नाम ढूंढ रही होंगी कि 2025 में जब SIR हुई थी तो हमारे माता-पिता या दादा-दादी ने अपना नाम दर्ज कराया था या नहीं, और अगर किसी वजह से उन्हें हमारा नाम 2025 की वोटर लिस्ट में नहीं मिला तो आप सोच सकते हो कि उनके साथ कितनी बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।

इसीलिए इस SIR को सिर्फ एक वोट की बात समझकर मत छोड़ देना।

जागरूक बनो और जागरूकता फैलाओ और एक दूसरे की मदद करते रहो। हमारे गांव, शहर, गली मोहल्ले और हमारी रिश्तेदारी, दोस्ती में कोई आदमी ऐसा ना बचे जिसका SIR फार्म न जमा हो पाये।
धन्यवाद
SIR का फार्म भर चुका एक जागरूक नागरिक

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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में अंकित बालियान की दोना फैक्ट्री है। अंकित बालियान ने अपनी इस फैक्ट्री में बीते दो वर्षों 13 मजदूरों को बंधक बनाकर रखा हुआ था। अंकित बालियान इन मजदूरों को बुरी तरह टॉर्चर करता था। मुजफ्फरनगर पुलिस ने इन मजदूरों को आज़ाद कराया है। जानकारी के मुताबिक़ अंकित ने फैक्ट्री में पिटबुल डॉग खुले छोड़े हुए थे। पिटबुल्स के डर से कोई भी मजदूर बंधन से निकलने की हिम्मत नही कर पाता था। अंकित ने मजदूरों पर कैसा-कैसा जुल्म किया है, इसकी गवाही मजदूरों के शरीर पर पड़े चोट के निशान दे रहे हैं। किसी के शरीर पर बेतहाशा चोटों के निशान थे तो किसी को पीट-पीटकर हाथ-पांव सुजा दिये गये थे।

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