आज के विचार
( मेरी बद्रीनाथ यात्रा – 13 )
एक फक्कड़ साधु से मुलाक़ात…..
3, 10, 2026
कल से आगे की यात्रा –
बद्रीनाथ के निकट हम पहुँच गये थे , मैंने साष्टांग प्रणाम किया उस भूमि को ….ये भूमि तप की भूमि है , ये भूमि साधना की भूमि है ….यहाँ भोग – विलास आदि के लिए कोई आता है …तो पाप करता है …..अजी ! यहाँ तो भगवान भी तप कर रहे हैं ..इसलिए यहाँ शंख तक नही बजाया जाता …उनके तप में विघ्न होगा इसलिए ।
बालक ! ये तप की भूमि है …..यहाँ तप करना …भजन करना बस । ‘वृद्ध बदरी’ नामक एक स्थान बद्रीनाथ से पहले पड़ता है ….हमने यहीं गाड़ी रोकी और दर्शन के लिए गये । “सौ या दो सौ वर्ष के बाद बद्रीधाम यहीं आने वाला है”…..एक फक्कड़ साधु इस मंदिर में हमें मिले ….उन्होंने हमें ये बताया । क्यों ? ऐसा क्यों ? अभी बद्रीधाम जहाँ है वहाँ नही रहेगा ? बाबा ने कहा …भोग वृत्ति बढ़ रही है इस धाम में …जिसके कारण ग्लेशियर पिघल रहा है …..उसी के कारण वो लुप्त हो जाएगा ….और भगवान बद्री यहीं आयेंगे …यही है भविष्य का बद्रीधाम । मैंने उन फक्कड़ साधु की बात सुनी …मुझे ठीक लगी …उनकी अपनी पीड़ा भी थी ….जहाँ शंख नही बजता था ..उस क्षेत्र में मॉल बन रहे हैं …..ये विकास की अंधी दौड़ है । फिर उन बाबा ने कहा ….छोड़ो इन बातों को …..कलियुग है ….जो होगा भगवान बद्री की इच्छा से ही होगा …तुम तो साधना करो इस भूमि में ये सब मत सोचो । मैं उनकी बातें सुनता रहा ।
वो फिर मुझ से बोले …कितनी करुणा है भगवान बद्रीनाथ में ….हमारे लिए , जगत मंगल के लिए वो तप कर रहे हैं ….फिर बोले ….नर नारायण का तप है बद्री में । नर कौन ? तुम …मुझे दिखाते हुये बोले …..नारायण, नर के अनादि मित्र हैं….ये बात तुम समझ रहे हो ? नर का मित्र नारायण ही हो सकता है …है । नारायण तप कर रहे हैं तो तुम्हें भी उनका साथ देना चाहिए । जोड़ी तो नारायण के साथ ही है तुम्हारी । वो फक्कड़ बाबा इतना ही बोले ….फिर मौन हो गये ….मौन ही रहे …….हमने उनको प्रणाम किया ……वो बस मुस्कुराये …..और हम आगे बढ़ गए थे ।
शेष यात्रा कल –
Hari sharan