युद्ध के दौरान पठानकोट एयरबेस से भारतीय विमान छंब की ओर बढ़ रहे थे। पाकिस्तानी रडार ने उन्हें पकड़ लिया और सेबर लड़ाकू विमान मुकाबले के लिए पहुंच गए। लेकिन उन्हें पता नहीं चला कि चार भारतीय नैट विमान नीचे उड़ते हुए उनके पीछे आ चुके हैं।
ट्रेवर कीलर ने एक पाकिस्तानी सेबर विमान का पीछा किया और करीब 200 गज की दूरी से अपनी 30 एमएम कैनन से फायरिंग की। गोली लगते ही दुश्मन का विमान अनियंत्रित होकर नीचे गिरने लगा। इस बहादुरी के लिए ट्रेवर को वीर चक्र देने की घोषणा की गई।
16 दिन बाद बड़े भाई डेन्ज़िल कीलर की बारी आई
चाविंडा सेक्टर में भारतीय नैट विमानों को मिस्टेयर विमानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी मिली। तभी चार पाकिस्तानी सेबर विमान सामने आ गए। डेन्ज़िल कीलर और उनके साथी विनय कपिला ने दुश्मन का पीछा करना शुरू किया।
विनय कपिला ने करीब 500 गज की दूरी से फायरिंग की और फिर दूसरा हमला किया। पाकिस्तानी विमान धुआं छोड़ते हुए नीचे गिरने लगा। दूसरी ओर डेन्ज़िल कीलर ने भी एक सेबर विमान पर हमला किया। विमान में आग और धुआं निकलने लगा और वह सरगोधा के पास जमीन पर जा गिरा।
लड़ाई के बाद डेन्ज़िल के विमान का टायर लैंडिंग के दौरान फट गया, जबकि विनय कपिला को ईंधन लगभग खत्म होने पर दूसरे एयरबेस पर उतरना पड़ा।
इस बहादुरी के लिए डेन्ज़िल कीलर और विनय कपिला को भी वीर चक्र से सम्मानित किया गया।
युद्ध के बाद भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर मार्शल अर्जन सिंह स्वयं लखनऊ में कीलर भाइयों के घर पहुंचे और उनके पिता को दोनों बेटों की बहादुरी के लिए बधाई दी।
दो सगे भाई, एक ही वर्दी और देश की रक्षा का एक ही जुनून! 🇮🇳
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