जिन हाथों में थी झाड़ू, आज उन्हीं में चमकी स्मार्टवॉच; बागपत में सफाई योद्धाओं का सम्मान, बोले- बच्चों को बताएंगे मेहनत कभी बेकार नहीं जाती
जो सबसे पीछे दिखते थे, आज सबसे आगे मंच पर थे; लाखों शिवभक्तों के बीच जिनका नाम कोई नहीं जानता था, आज उन्हीं का नाम लेकर हुआ सम्मान
हाथ में स्मार्टवॉच बांधते ही बोले सफाईकर्मी—अब समय भी देखेंगे और वह दिन भी याद रखेंगे जब हमारी मेहनत को पहचान मिली
एक बार का सम्मान नहीं, लगातार तीसरी बार प्रोत्साहन; बागपत में मेहनत को पहचान देने की बन रही संस्कृति
बागपत, 15 अगस्त। जिन हाथों में कुछ दिन पहले तक पुरा महादेव में लाखों शिवभक्तों की आस्था की राह स्वच्छ रखने के लिए झाड़ू थी, स्वतंत्रता दिवस पर उन्हीं हाथों में सम्मान था। किसी ने स्मार्टवॉच हाथ में बांधकर गौर से देखी तो किसी ने प्रमाणपत्र सीने से लगा लिया। किसी ने मोबाइल से सम्मान का पल कैद किया तो कोई साथी कर्मी को अपनी घड़ी दिखाकर मुस्कुरा उठा। कलेक्ट्रेट सभागार में खिले ये चेहरे बागपत के उस श्रम की कहानी कह रहे थे, जो आमतौर पर दिखाई कम देता है, लेकिन किसी बड़े आयोजन की व्यवस्था में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पुरा महादेव के जीरो वेस्ट महोत्सव को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाने में दिन-रात जुटे 130 सफाईकर्मियों को जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने प्रमाणपत्र और स्मार्टवॉच देकर सम्मानित किया। भारी बारिश, लगातार उमड़ती भीड़ और चौबीसों घंटे की चुनौती के बीच इन सफाई योद्धाओं ने कचरा संग्रह, डस्टबिन प्रबंधन, पूजा सामग्री को अलग करने और जरूरत के अनुसार तत्काल सफाई की जिम्मेदारी संभाली थी। लाखों शिवभक्त ‘हर-हर महादेव’ का जयघोष करते हुए आगे बढ़ रहे थे और पीछे इन कर्मयोगियों की टीम आस्था की राह को स्वच्छ रखने में लगी थी।
जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने कहा कि पुरा महादेव का जीरो वेस्ट महोत्सव केवल प्रशासन की व्यवस्था से सफल नहीं हुआ, बल्कि सभी कर्मयोगियों, स्वयंसेवकों और नागरिकों-श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इसे सफल बनाया। उन्होंने कहा कि जो लोग किसी बड़े आयोजन के दौरान सबसे पहले अपनी ड्यूटी पर पहुंचते हैं और सबसे अंत में लौटते हैं, उनके श्रम को पहचान मिलना जरूरी है। सफाईकर्मियों ने भारी बारिश और लगातार भीड़ के बीच जिस समर्पण से काम किया, वही जीरो वेस्ट महोत्सव की वास्तविक ताकत रहा। आज उन्हें सम्मानित करना उनके प्रति धन्यवाद के साथ-साथ यह संदेश देना भी है कि मेहनत कभी अनदेखी नहीं जाती। उन्होंने कहा कि ‘भक्ति भी, प्रकृति भी’ का संदेश तभी सार्थक है, जब आस्था के साथ प्रकृति और स्वच्छता की जिम्मेदारी भी निभाई जाए। पुरा महादेव में सफाईकर्मियों ने इस भावना को अपने श्रम से साकार किया। स्वतंत्रता दिवस पर गंदगी, प्लास्टिक और गैर-जिम्मेदारी वाली सोच से आजादी का संकल्प इसी भावना को आगे बढ़ाता है।
सम्मान पाकर सफाईकर्मियों की खुशी देखते ही बन रही थी। एक कर्मी ने कहा, “हम तो हमेशा झाड़ू लेकर अपना काम करते रहे। आज पहली बार किसी ने हमारा नाम लेकर मंच से सम्मान किया है। इसे अपने बच्चों को भी बताएंगे कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती।” दूसरे कर्मी ने कहा कि पुरा महादेव में लाखों श्रद्धालुओं की सेवा करना अपने आप में गर्व की बात थी, लेकिन प्रशासन ने उनके काम को पहचान देकर हौसला और बढ़ा दिया।
कई सफाईकर्मियों ने सम्मान मिलते ही स्मार्टवॉच हाथ में पहन ली। किसी ने समय देखा, किसी ने साथी की घड़ी से अपनी घड़ी मिलाई और किसी ने मुस्कुराते हुए कहा कि अब यह घड़ी उन्हें उस दिन की याद दिलाएगी, जब उनके काम को भी मंच पर पहचान मिली। कर्मचारियों के बीच यह भी चर्चा रही कि बागपत प्रशासन ने लगातार तीसरी बार सम्मान देकर उनका हौसला बढ़ाया है। एक कर्मी ने भावुक अंदाज में कहा, “सरकार हो तो ऐसी, डीएम हो तो ऐसी, जिसमें हम जैसे लोगों की मेहनत को भी सम्मान मिले।”
यह सम्मान केवल एक उपहार तक सीमित नहीं रहा। पुरा महादेव में जिस स्वच्छता व्यवस्था को इन कर्मियों ने जमीन पर उतारा, उसका संदेश भी स्वतंत्रता दिवस से जोड़ा गया। सफाईकर्मियों ने उत्साह के साथ उद्घोष किया—“गंदगी से आजादी… प्लास्टिक से आजादी… गैर-जिम्मेदारी से आजादी।” इसके बाद आवाज गूंजी—“स्वच्छ बागपत, हमारी जिम्मेदारी।” ‘भक्ति भी, प्रकृति भी’, ‘आस्था भी, जिम्मेदारी भी’ और ‘जीरो वेस्ट महोत्सव—बागपत ने कर दिखाया’ के नारों से सभागार में नई ऊर्जा दिखाई दी।
पुरा महादेव में जीरो वेस्ट महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही के बीच स्वच्छ वातावरण बनाए रखना, पूजा सामग्री का पृथक्करण करना, डस्टबिन व्यवस्था को लगातार सक्रिय रखना और जरूरत पड़ते ही सफाई सुनिश्चित करना इस पूरी व्यवस्था का हिस्सा रहा। इन कर्मयोगियों ने इसी जिम्मेदारी को अपनी सेवा बनाया। महादेव के भक्तों की राह स्वच्छ रखना ही उनकी सेवा-साधना बन गई।
सम्मान में सामाजिक भागीदारी भी जुड़ी। जन उदय फाउंडेशन के सीएसआर सहयोग से सफाईकर्मियों के लिए स्मार्टवॉच एवं युवाओं के लिए एयरड्रॉप्स की व्यवस्था की गई। फाउंडेशन के चीफ फंक्शनरी भानु प्रताप सिंह तथा प्रतिनिधि आदित्य चौधरी और नितिन तोमर ने इस सहयोग में भूमिका निभाई। इस तरह सम्मान समारोह में प्रशासन और सामाजिक क्षेत्र की साझेदारी भी दिखाई दी—सरकार ने श्रम को पहचान दी और सामाजिक संस्था ने सम्मान को उपयोगी प्रोत्साहन से जोड़ा।
जिलाधिकारी ने जन उदय फाउंडेशन के सीएसआर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि समाज और प्रशासन की साझेदारी से सम्मान की यह पहल और प्रभावी बनी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक संस्थाओं का इस प्रकार आगे आकर कर्मयोगियों के सम्मान में सहयोग करना जनभागीदारी की भावना को और मजबूत करता है। जब प्रशासन, सामाजिक संस्थाएं, युवा और नागरिक एक साथ खड़े होते हैं, तो किसी भी अच्छे प्रयास का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।
बागपत ने पुकारा तो युवा शक्ति ने कहा—हम तैयार
इसी दिन बागपत की युवा शक्ति को भी सम्मान मिला। नंदनकानन वन में आयोजित कार्यक्रम में सिविल डिफेंस के 115 और स्काउट-गाइड के 25, कुल 140 युवा स्वयंसेवकों को प्रमाणपत्र और एयरपॉड्स देकर सम्मानित किया गया। पुरा महादेव के आयोजन में इन युवाओं ने श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन, भीड़ व्यवस्था, अनुशासन, सुविधा और जरूरतमंदों की सहायता में सक्रिय भूमिका निभाई थी। डिप्टी कलेक्टर / नागरिक सुरक्षा उपनियंत्रक दीपशिखा सिंह के नेतृत्व में स्वयंसेवकों ने विभिन्न व्यवस्थाओं की कमान संभाली थी।
किसी ने बुजुर्ग श्रद्धालु का हाथ थामा, किसी ने महिला और बच्चों को रास्ता बताया, किसी ने भीड़ के बीच व्यवस्था संभाली तो किसी ने जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता पहुंचाई। भारी बारिश और लगातार भीड़ के बीच भी युवा सेवा में जुटे रहे। ‘हमारा जनपद, हमारी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ उन्होंने यह साबित किया कि युवा केवल दर्शक नहीं, बल्कि अपने जिले की व्यवस्था में सक्रिय भागीदार बन सकते हैं।
सम्मान मिलने के बाद युवाओं ने भी उत्साह के साथ आगे इसी तरह सेवा करने का संकल्प दोहराया। सामूहिक आवाज गूंजी—“एक आवाज पर तैयार, बागपत की सेवा के लिए तैयार।” इसके बाद ‘हमारा जनपद—हमारी जिम्मेदारी’ का उद्घोष हुआ तो नंदनकानन वन का वातावरण तालियों और उत्साह से भर गया। युवाओं ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए आगे और जिम्मेदारी से काम करने की प्रेरणा है।
युवा स्वयंसेवकों के सम्मान पर जिलाधिकारी ने कहा कि बागपत की युवा शक्ति ने यह साबित किया है कि जब जिले को युवाओं की जरूरत पड़ी, उन्होंने एक आवाज पर अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की। सिविल डिफेंस और स्काउट-गाइड के युवाओं ने श्रद्धालुओं की सहायता से लेकर व्यवस्था और सेवा तक जिस अनुशासन के साथ योगदान दिया, वह हमारे लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि ‘हमारा जनपद, हमारी जिम्मेदारी’ केवल एक उद्घोष नहीं, बल्कि युवा शक्ति की सोच बननी चाहिए। आज सम्मान पाने वाले युवा आगे भी इसी भावना के साथ समाज और जनपद के लिए काम करें और दूसरे युवाओं को भी प्रेरित करें, यही इस सम्मान का उद्देश्य है।
जीरो वेस्ट महोत्सव में डिजिटल और युवा जनभागीदारी को जोड़ने में सूचना विभाग के समन्वय से माय भारत यूथ लीडर एवं राज्य युवा पुरस्कार विजेता अमन कुमार ने भी योगदान दिया। उन्होंने युवाओं की भूमिका साझा करते हुए बताया कि बागपत प्रशासन द्वारा युवाओं को इम्पैक्ट डिलीवरी सिस्टम का हिस्सा बनाने के प्रयास बेहद प्रेरक है। यह सम्मान हमारे लिए केवल खुशी का अवसर नहीं, बल्कि आगे और बेहतर काम करने की जिम्मेदारी है। जिस विश्वास के साथ प्रशासन ने युवाओं को अवसर दिया, हम उसे आगे भी पूरी मेहनत और निष्ठा से निभाएंगे।
पुरा महादेव के जीरो वेस्ट महोत्सव में ‘भक्ति भी, प्रकृति भी’ का संदेश केवल मंच से नहीं दिया गया, बल्कि सफाईकर्मियों और युवाओं की भागीदारी से जमीन पर दिखाई दिया। एक ओर सफाई योद्धाओं ने स्वच्छता की जिम्मेदारी संभाली, दूसरी ओर युवा स्वयंसेवकों ने श्रद्धालु सुविधा और व्यवस्था में सहयोग दिया। पुलिस, प्रशासन, स्वयंसेवकों और स्थानीय स्तर पर जुड़े अन्य सहयोगियों के साथ यह सामूहिक प्रयास बड़े आस्था आयोजन को अधिक स्वच्छ, सुव्यवस्थित और श्रद्धालु-केंद्रित बनाने में सहायक रहा।
सम्मान ने बदला माहौल, चेहरों पर दिखा आत्मविश्वास
दोनों कार्यक्रमों में सबसे खास बात यह रही कि सम्मान पाने वाले लोगों के चेहरे पर केवल पुरस्कार पाने की खुशी नहीं, बल्कि “हमारे काम को देखा गया” का आत्मविश्वास दिखाई दिया। सफाईकर्मियों के लिए स्मार्टवॉच उनकी मेहनत की पहचान बनी तो युवाओं के लिए एयरपॉड्स उनके सेवाभाव का प्रोत्साहन।
कलेक्ट्रेट सभागार में सफाईकर्मियों के बीच एक सवाल भी गूंजा—“जीरो वेस्ट महोत्सव का चैंपियन कौन?” सैकड़ों आवाजें एक साथ आईं—“हम!” फिर आवाज उठी—“स्वच्छ बागपत का चैंपियन कौन?” जवाब आया—“हर नागरिक!” यही इस सम्मान समारोह का सबसे बड़ा संदेश बन गया। स्वच्छता केवल सफाईकर्मी की जिम्मेदारी नहीं और जनसेवा केवल प्रशासन का काम नहीं। जब व्यवस्था को मेहनत करने वाले हाथ मिलते हैं, युवाओं की ऊर्जा जुड़ती है और समाज भागीदारी करता है, तो किसी भी बड़े आयोजन की तस्वीर बदल सकती है।
स्वतंत्रता दिवस पर बागपत ने पुरा महादेव के जीरो वेस्ट महोत्सव के इन कर्मयोगियों को सम्मान देकर यही संदेश दिया—जिस श्रम ने आस्था के सबसे बड़े उत्सव को स्वच्छ बनाया, वह श्रम अनदेखा नहीं रहेगा; जिस युवा शक्ति ने जरूरत पड़ने पर अपने जिले के लिए कदम बढ़ाया, उसका विश्वास भी बढ़ाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि पुरा महादेव में इस बार अनेकों लोग केवल बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए ही नहीं पहुंचे, बल्कि मेले में किए गए नए प्रयोगों और व्यवस्थाओं को देखने की उत्सुकता भी उन्हें यहां खींच लाई। जीरो वेस्ट महोत्सव, क्यूआर आधारित कांवड़ यात्रा एप, पिंक रिट्रीट, वूमेन डॉक्टर्स ऑन बाइक, पुनःप्रयोग योग्य सामग्री, बर्तन बैंक और सफाई की अलग व्यवस्था के बारे में सुनकर कई लोग मेला क्षेत्र पहुंचे और व्यवस्थाओं को करीब से देखा। श्रद्धालुओं के साथ ऐसे लोग भी नजर आए जो फाल्गुनी जीरो वेस्ट महोत्सव के बारे में सुनकर प्रेरित होकर आए थे। यही वजह रही कि पुरा महादेव में इस बार दर्शन के साथ नवाचार देखने की भी उत्सुकता दिखाई दी।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त राजस्व विनीत कुमार उपाध्याय, अपर जिलाधिकारी न्यायिक देवेंद्र पांडे, डिप्टी कलेक्टर / नागरिक सुरक्षा उपनियंत्रक दीपशिखा सिंह जन उदय फाउंडेशन के पदाधिकारी, जिला सूचना अधिकारी राहुल सिंह भाटी, खाद्य सुरक्षा सहायक आयुक्त डीपी सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
सूचना विभाग बागपत