दक्षिण भारत की राजनीति में ब्राह्मणों का कोई प्रभाव नही है तमिलनाडु में किसी भी दल ने ब्राह्मणों को टिकट नही दिया था


उत्तर भारत में जहां मंदिर आंदोलन और हिंदुत्व राजनीति का जबरदस्त प्रभाव रहा है, वहीं दक्षिण भारत में ये प्रभाव शून्य नजर आता है
उत्तर भारत की राजनीति में ब्राह्मण और क्षत्रिय वर्ण का जबरदस्त प्रभाव है यहां तक अम्बेडकरवादी, समाजवादी, मंडलवाद और सामाजिक न्याय की राजनीति करने वाले दल भी अपनी पार्टी की नीति अगड़ी जातियों को ध्यान में रखकर बनाते हैं
टिकट भी जमकर सवर्ण जातियों को देते हैं महासचिव, प्रवक्ता और एडवाइजर का पद भी सवर्णों को देते हैं इसी कारण बिहार विधानसभा में 243 में से 71 MLA सवर्ण हैं जबकि राज्य में उनकी आबादी 10% है.
यूपी बिहार में OBC SC समाज के नेताओं को इन्हीं समीकरण को ध्यान में रखकर टिकट देना चाहिए सवर्ण हमसे न की हम सवर्ण से है ये हमारे बिना प्रधानी का भी चुनाव नहीं जीत सकते हैं!