मिथुन चक्रवर्ती बचपन में नक्सली हुआ करते थे। कुछ वर्षों में वह पुलिस की लिस्ट में इनामी बदमाश हो गए थे लेकिन इसी बीच इनके भाई की करंट लगने के कारण मौत हो गई जिससे उन्हें नक्सली मार्ग छोड़कर वापस घर आना पड़ा।

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इसके बाद इन्होंने मार्शल आर्ट सीखी और फिर फिल्मी दुनिया में चले गए। अपने फिल्मी करियर में वह वामपंथी विचारधारा के थे। भले ही वह फिल्मों में थे लेकिन ज्योति बसु, बुद्धदेव भट्टाचार्य जैसे वाम मुख्यमंत्रियों से उनका सीधा संबंध था।

राजनीतिक महत्वाकांक्षा के चलते वामपंथी नेताओं से मनमुटाव बढ़ने की खबरें चली और वामपंथ के ढलते साम्राज्य की भनक को भांपते हुए इन्होंने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा और वहां से सीधे राज्यसभा सांसद बने।

इसी बीच इनका भी नाम प्रसिद्ध शारदा चिट फंट घोटाले में आ गया। फिर क्या था, इन्होंने भी भाजपा का दामन थाम लिया और आज अन्य असंख्य नेताओं की भांति भाजपाई है। इनकी भी मुख्यमंत्री, मंत्री बनने की संभावना बताई जाती रही है।

आज भले ही भाजपा में है लेकिन सिर पर पहनी चे–ग्वेरा की मार्का टोपी बता रही है कि विचारधारा कभी नहीं मरती फिर चाहे वह कोई दक्षिणपंथी हो या वामपंथी असल अक्स किसी ना किसी रूप में जाने अनजाने झलक ही जाया करते हैं।

आरपीविशाल

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